Noida Maharishi Ashram Land Case: नोएडा के सेक्टर-110 स्थित महर्षि आश्रम ट्रस्ट की 3.36 एकड़ जमीन की बिक्री और कथित भूमि घोटाले की जांच अब तेज हो गई है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर गठित विशेष जांच दल (SIT) ने गुरुवार को नोएडा प्राधिकरण और जिला प्रशासन के अधिकारियों से मामले को लेकर विस्तृत पूछताछ की। जांच का मुख्य उद्देश्य जमीन की बिक्री से जुड़े तथ्यों और पूरी प्रक्रिया की वास्तविक स्थिति सामने लाना है। इसके लिए एसआईटी ने जिलाधिकारी (डीएम) और नोएडा प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) की संयुक्त टीम गठित कर तथ्यात्मक रिपोर्ट तैयार करने और उसे सौंपने के निर्देश दिए हैं। एसआईटी की पूछताछ के बाद अब जिला प्रशासन और प्राधिकरण की संयुक्त रिपोर्ट पर सभी की नजरें टिकी हैं। SIT ने मांगे जमीन रिकॉर्ड एसआईटी ने जिला प्रशासन से सवाल किया कि महर्षि आश्रम की जमीन नोएडा प्राधिकरण की अधिसूचित सीमा में आने के बावजूद अब तक राजस्व अभिलेखों में प्राधिकरण का नाम क्यों दर्ज नहीं किया गया। इस पर प्रशासन की ओर से बताया गया कि जमीन के नामांतरण की प्रक्रिया फिलहाल चल रही है। एसआईटी ने नोएडा प्राधिकरण से गेझा, भंगेल और सलारपुर गांवों की अधिग्रहीत भूमि से संबंधित पूरा रिकॉर्ड भी मांगा है। इसके साथ ही जमीन के अधिग्रहण की प्रक्रिया, उससे जुड़े नियमों और अब तक की गई कार्रवाई की जानकारी भी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। इससे पहले भी मामले की गंभीरता को देखते हुए प्राधिकरण के अधिकारियों को लखनऊ बुलाकर पूछताछ की जा चुकी है। ED जांच में बड़े खुलासे वहीं आपको बता दें कि इस मामले की जांच प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी कर रहा है। ईडी ने 15 मई को इस प्रकरण में छापेमारी के बाद दो आरोपियों को गिरफ्तार किया था। जांच एजेंसी के मुताबिक, स्पिरिचुअल रीजेनेरेशन मूवमेंट फाउंडेशन ऑफ इंडिया (SRMF) ट्रस्ट की जमीन की बिक्री कथित तौर पर एक सुनियोजित भूमि घोटाले का हिस्सा थी। ईडी की जांच में आरोप सामने आया है कि राम चंद्र मोहन ने वर्ष 2010 में खुद को ट्रस्ट का कोषाध्यक्ष बताते हुए ट्रस्ट से मिलता-जुलता नाम इस्तेमाल किया और कथित तौर पर फर्जी पैन कार्ड के जरिए बैंक खाते खुलवाए। आरोप है कि इसके बाद जमीन के सौदे को अंजाम देने की साजिश रची गई। जांच में आकाश मालवीय पर भी खुद को ट्रस्ट का कार्यकारी सदस्य बताकर फर्जी बिक्री विलेख पर हस्ताक्षर करने का आरोप है। संयुक्त जांच जांच एजेंसियों के अनुसार, गेझा तिलपताबाद क्षेत्र में स्थित यह जमीन वर्ष 2024-25 में सिंह वाहिनी इंफ्रा प्रोजेक्ट्स को बेची गई थी। अब इस पूरे प्रकरण में एसआईटी और ईडी की समानांतर जांच चल रही है। एक ओर एसआईटी जमीन के राजस्व रिकॉर्ड, अधिग्रहण प्रक्रिया और नोएडा प्राधिकरण की भूमिका से जुड़े तथ्यों की पड़ताल कर रही है, वहीं ईडी कथित फर्जी दस्तावेजों, बैंक खातों और जमीन की बिक्री से जुड़े वित्तीय लेन-देन की जांच कर रहा है। ऐसे में जिला प्रशासन और नोएडा प्राधिकरण की संयुक्त तथ्यात्मक रिपोर्ट को इस बहुचर्चित भूमि प्रकरण की जांच में बेहद अहम माना जा रहा है। ये भी पढ़ें: पुलिस मुठभेड़ में स्नैचिंग और चोरी गैंग का बदमाश घायल, तीन गिरफ्तार